कुछ बातें जो मै सोचता हूँ .........
नक्सली हिंसा का सख्त विरोध होना चाहिए ....... पर सरकार प्रायोजित हिंसा का भी ।
किसी एक व्यक्ति की सनक के कारण (पी चिदंबरम) पूरा समाज मुद्दे को गलत तरीके से देख रहा है।
किसी क्षेत्र को प्रशासनिक नियंत्रण में लेना एक बात है और सी आर पी फ के द्वारा काम्बिंग करना दूसरी बात।
गर हम अपने लोगो को ही ढूंड कर मारना चाहते थे तो नक्सलियो ने क्या गलत किया अपनी सोच में वो भी सही हैं , जवान पिकनिक मनाने तो वहाँ गए नहीं थे ।
सरकार की ताकत के सामने नक्सली कहीं नहीं ठहर सकते फिर भी हमारे ७६ जवान मारे गए, इससे पहले २६/११ को भी हम असहाय दिखे थे ....... क्या देश वाकई सुरक्षित है ? हमारे जवानों की जान की कीमत शायद सत्ता में बैठे लोगो के लिए कोई मायने नहीं रखती ......
बुधवार, 14 अप्रैल 2010
रविवार, 28 फ़रवरी 2010
कविता
प्रेम को न दान दो न दो दया
प्रेम तो सदेव ही समृद्ध है
प्रेम है की ज्योति स्नेह एक है
प्रेम है की प्राण देह एक है
प्रेम है की विश्व गेह एक है
प्रेमहीन गति प्रगति विरुद्ध है
प्रेम तो सदेव ही समृद्ध है ...........
------गोपाल दास नीरज
प्रेम का त्यौहार होली आप सभी के जीवन में नई खुशिया लाये ।
प्रेम तो सदेव ही समृद्ध है
प्रेम है की ज्योति स्नेह एक है
प्रेम है की प्राण देह एक है
प्रेम है की विश्व गेह एक है
प्रेमहीन गति प्रगति विरुद्ध है
प्रेम तो सदेव ही समृद्ध है ...........
------गोपाल दास नीरज
प्रेम का त्यौहार होली आप सभी के जीवन में नई खुशिया लाये ।
बुधवार, 10 फ़रवरी 2010
खाद्यान्न उत्पादन
हमारी मुख्यमंत्री का कहना है की प्रदेश में खाद्यान्न उत्पादन दोगुना किया जायेगा । इस संदर्भ में मै सम्बंधित अधिकारियो का ध्यान भूमि व्यवस्था की और दिलाना चाहूँगा। हमारे प्रदेश में खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में भूमि पर दबाब बहुत ज्यादा है । आजादी के बाद भूमि सुधारो को हम अभी तक सही तरीके से लागू नहीं कर पाए । यही नहीं जोतो का आकार विखंडित होकर कम ही होता जा रहा है । ऐसे में चकबंदी जो की भूमि सुधारो का एक महतवपूर्ण तरीका है, को एक बार फिर से अपनाये जाने की जरुरत है । जिससे किसान जो भी जोत का आकार उनके पास बचा है , पर सही तरीके और कम लागत से खेती कर सके । यही नहीं जिन लोगो ने छोटे जोत के आकार के कारन खेती करना छोड़ दिया हे वह खेती करने को प्रेरित हो सके।
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2009
हिंद स्वराज
मैंने हिंद स्वराज बहुत दिनों पहले पढ़ी थी , और अक्सर सुनता हूँ की अगर गाँधी को समझना हे तो हिंद स्वराज ध्यान से पढो, तो आज फिर से पढ़ी। पर एक बार मै फिर से निराश ही हुआ क्योकि मुझे पूरी पुस्तक में सत्याग्रह के विचार के सिवा बाकी बेमतलब लगता है। गांधीवादियोंको भले ये अच्छा न लगे वो भी तब जब अगले महीने हिंद स्वराज के १०० साल पुरे हो रहे हैं।
रविवार, 11 अक्टूबर 2009
naksalvad
आज कल चर्चा में ऑक्सफोर्ड की उपज p c नक्सलवाद को जड़ से ख़त्म करेंगे । कोई उनसे मेरी तरफ़ से कह दे कोई भी आन्दोलन जिसकी जड़े अन्याय के गर्भ में हो अबोर्शन भी उसे पैदा होने से नही रोक सकता। नक्सलवाद का समाधान राजनितिक, आर्थिक और सामाजिक संदर्भो में ढूंढा जाय तो ज़्यादा बेहतर होगा प्रिय pc.
jay prakash .... the real hero
आज ११ october जय प्रकाश नारायण की जयंती है। सुबह न्यूज़ पेपर पढने के बाद सोच रहा हूँ जे पी बाज़ार में खो गए - बिग बॉस के या जे यस मिल के शब्दों में सोचू सुखो में गुणात्मक अन्तर ज़्यादा महतव्पूर्ण है बजाय
मात्रा के kyunki पिछले कुछ saalo से कम से कम mai to नही bhoola hun ki aaj jay प्रकाश नारायण का जन्म divas है।
मात्रा के kyunki पिछले कुछ saalo से कम से कम mai to नही bhoola hun ki aaj jay प्रकाश नारायण का जन्म divas है।
गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009
अपना घर
वह झांडू लगाने वाली औरत
रोज़ सुबह दिखाई देती है ,
उस रास्ते पर
जहाँ से मुझे जाना अच्छा लगता हे
क्यूंकि वहां है एक ऐसा घर
जिसे शहर के कुछ लोग
अपना घर के नाम से जानते हैं ,
जिसमे रहते हैं स्टेशन पर
रहने वाले कुछ बच्चे ,
पर आजकल उस रास्ते से जाना
मुझे अच्छा नही लगता
क्यूंकि
आजकल दिखाई देती हैं
वह दो छोटी लड़किया
जो उस औरत के साथ
सफाई करती नज़र आती हैं
उस रास्ते की ,
और उसमे से एक बमुश्किल
सात- आठ साल की है ।
रोज़ सुबह दिखाई देती है ,
उस रास्ते पर
जहाँ से मुझे जाना अच्छा लगता हे
क्यूंकि वहां है एक ऐसा घर
जिसे शहर के कुछ लोग
अपना घर के नाम से जानते हैं ,
जिसमे रहते हैं स्टेशन पर
रहने वाले कुछ बच्चे ,
पर आजकल उस रास्ते से जाना
मुझे अच्छा नही लगता
क्यूंकि
आजकल दिखाई देती हैं
वह दो छोटी लड़किया
जो उस औरत के साथ
सफाई करती नज़र आती हैं
उस रास्ते की ,
और उसमे से एक बमुश्किल
सात- आठ साल की है ।
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